Sunday, 6 August 2017

Happy friendship day

हम नदी बनकर मिलने चले आएंगे...
बन समंदर अगर तुम मिलो जो कहीं !!

हम बादल बनकर मिलने चले आएंगे...
बन सावन गर तुम मिलो जो कहीं !!

हम धुप बनकर मिलने चले आएंगे...
बन सर्दियों के मौसम बन कर मिलो जो कहीं !!

हम हवा बनकर मिलने चले आएंगे...
बन खुशबू अगर तुम मिलो जो कहीं !!


Monday, 17 July 2017

ये बारिश.. और फिर वही..

""ये बारिश.. और
फिर वही.. सौंधी यादें पुरानी फिर वही
फिर वही.. फिर वही.. बिसरी भूली कहानी फिर वही..!!
कुछ अधूरा सा.. फिर वही ख़यालों का सफ़र फिर वही..
कुछ इंतज़ार सा फिर वही वक्त की रेत पे बिखेर फिर वही...!! 

Sunday, 16 July 2017

राही मेरे सफ़र का,,,,

राही मेरे सफ़र का ,,,
अभी अभी इक याद गुज़रा ,,,
ज़रा ख़फा था ,,,
हाँ वो इक सफ़र था ,,

फुरसतों  का सफ़र था ,,,
लम्हों की लम्हों से दोस्ती थी ,,
फिर ,,
ज़रा ख़फा था ,,,
हाँ वो इक सफ़र था ,,

Saturday, 10 June 2017

ख्याल ,,ख्वाब,,नींद ,,और तुम ,,,

ख़ाली ख़ाली सा लगता है ,,,
ये पल ,,,
ख़्यालो के ये बादळ ख़ाली से  है,,
लफ़्जों में  तुमको पिरोए कैसे ,,
ये ख़्वाब नींद और तुम उलझ गए हो,,,

किसी नज्म सा लगता है नाम तुम्हारा... देखो तुम्हें याद करते-करते हम शायर बन गए !


Tuesday, 21 March 2017

'''कुछ किरणें ,,,,यादों की ,,,,

'''कुछ किरणें ,,,,यादों की ,,,,
 उफ़क के दरीचों से झाँकने लगी ,,,,,
 बादलों की ओंट में मुस्कुराने लगी,,, कभी  तन्हाई है ,,,,
 तन्हा सा गुज़रता है ,,,
 खामखाँ  आहटों पे चौकता है ,,,,
 शब यूँ ही कटता है ,,,,
 ज़रा छू  कर देख बादल की खामोंशियां ,,,,
 आ ख़ुशरंग ख़्वाब ज़रा  ,,,,
 ज़र्द सितारों के हाथ थाम ज़रा ,,,,
 क्या कहती हैं सरगोशियां ,,,,