Saturday, 10 June 2017

ख्याल ,,ख्वाब,,नींद ,,और तुम ,,,

ख़ाली ख़ाली सा लगता है ,,,
ये पल ,,,
ख़्यालो के ये बादळ ख़ाली से  है,,
लफ़्जों में  तुमको पिरोए कैसे ,,
ये ख़्वाब नींद और तुम उलझ गए हो,,,

किसी नज्म सा लगता है नाम तुम्हारा... देखो तुम्हें याद करते-करते हम शायर बन गए !


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