'''कुछ किरणें ,,,,यादों की ,,,,
उफ़क के दरीचों से झाँकने लगी ,,,,,
बादलों की ओंट में मुस्कुराने लगी,,, कभी तन्हाई है ,,,,
तन्हा सा गुज़रता है ,,,
खामखाँ आहटों पे चौकता है ,,,,
शब यूँ ही कटता है ,,,,
ज़रा छू कर देख बादल की खामोंशियां ,,,,
आ ख़ुशरंग ख़्वाब ज़रा ,,,,
ज़र्द सितारों के हाथ थाम ज़रा ,,,,
क्या कहती हैं सरगोशियां ,,,,
उफ़क के दरीचों से झाँकने लगी ,,,,,
बादलों की ओंट में मुस्कुराने लगी,,, कभी तन्हाई है ,,,,
तन्हा सा गुज़रता है ,,,
खामखाँ आहटों पे चौकता है ,,,,
शब यूँ ही कटता है ,,,,
ज़रा छू कर देख बादल की खामोंशियां ,,,,
आ ख़ुशरंग ख़्वाब ज़रा ,,,,
ज़र्द सितारों के हाथ थाम ज़रा ,,,,
क्या कहती हैं सरगोशियां ,,,,
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